फ्वळ्यै ग्याइ "(गज़ल)
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दळिम्यां की मेलि सि,एक बूंद आंसु कि,गळ्वड़्यूं मा उत्तड़ैकि,
चर्यौ सि फ्वळ्यै ग्याइ ॥
बर्खा कि बणदरि सि,एक धारि आंसु कि,आंख्यूं कि पतन्यर्यूं मा,पाणि सि रळ्यै ग्याइ ॥
बसगळ्या दीड़ौ सि,एक छ्वाया आंसु सि,जिकुड़ि फोड़ि-फाड़िक,खुद सि छ्वळ्यै ग्याइ ॥
लुण्यां-अलुण्यां मनतति सि,एक तौलि आंसु कि,हथ-खुट्यूं का पराज़,स्यळ्यै कि हळ्यै ग्याइ ॥
काळि कळचुण्डि कुएड़ि सि,काज़ोळ सि आंख्यूं मा,एक गुरमुळि माया कि,बिनै कि कळ्यै ग्याइ ॥
चर्यौ सि फ्वळ्यै ग्याइ ॥

पयाश पोखड़ा

+91 92132 27970

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