सौंगु च फांस खाणु (गज़ल)
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कठण च ठ्यलिणि जिदंगि यख,पर सौंगु च फांस खाणु ।
जन-कनौ कि बसै बात नि भुला,ख्वळु-ख्वळु भांडा मंजाणु ॥
ब्वनि च त ब्वन दे तू दुन्यां थैं,कैकु गिच्चू कैल थामा ।
कबरि तक जि रैलु तू ढौळ पुर्यास्यूं बिग्च्यां द्यप्तों नचाणुं ॥
बट्या-बाट जु अबट्टा गैन,वो क्य बाटु बताला,चौबट्टा मा छुट्यूं मनिखि कु,सौंगु नि हूंदु घार आणु ॥
त्यारा गांवा का सच ब्वल्दरा भि,झणि कै वुभरा लुक्यान ।
हांझूट धौ राई रातदिन गौं मा,कांसि कु कट्वरा नचाणु ॥
जेठ-बैसाक कतल कै रूझिगीं,ऐंसु का साल रूड़्यूं मा ।
भलि कै छपत्वळ्ये ग्याइ "पयाश",ह्यूंदम को जि यख आणु ॥

पयाश पोखड़ा

+91 92132 27970

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