"आंसू" (गज़ल)
************************
**************************
भारी-भरसक कैकि आंख्यूं हैंसाणु 
रौं मि सदनि ।
युं खुदेड़ आंख्यूं मा आंसु लुकाणु 
रौं मि सदनि॥
आंख्यूं मा जन दणमण-दणमण 
चौमस्या बरखा,तरकण्यां गळ्वड़युं का आंसु सुखाणु 
रौं मि सदनि ॥
काज़ोळ आंख्यूं का छाळा आंसु 
थम्दा-थम्दा,नै इगसि-बग्वळि तक आंसु पुर्याणु 
रौं मि सदनि ॥
बस कैरहैंस्दा-हैंस्दा कखि रुणुं नि
ऐ जाव मिथैं,रैड़ नि जैं आंसु इलै आंख्यूं झुकाणु 
रौं मि सदनि ॥
मेरि आंख्यूं का पाणि को क्य मोल-
तोल लगांदि,खाळा-म्याळों मा अपणा आंसु बिकाणु
रौं मि सदनि ॥
स्वीणा बणि कै कभि आला त वो
मेरि आंख्यूं मा,ह्यरदा-ह्यरदा अपणा आंसु बुथ्याणु
रौं मि सदनि ॥
त्वै याद करदा-करदा जनि मेरि 
जिकुड़ि स्यळ्याई,तनि सुख्यां आंसु मा आग लगाणु
रौं मि सदनि ॥
तेरि खुदेड़ माया की तुलबुल तामि
भोरि-भारिक,
'
पयाशका पुरणा पैंछा आंसु चुकाणु
रौं मि सदनि ॥

पयाश पोखड़ा

+91 92132 27970

PUBLICIZED BY उत्तराखंड की लगूली