मि हिटणु रौं (गज़ल)
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मि हिटणु रौं, मि हिटणु रौं, मि हिटणु रौं ।
खुट्यूं का छाळौ थैं किटणु रौं,
मि किटणु रौं ॥
निंद मलसणि राया मुण्ड,सर्या-सर्या उमर,अदनिंदळ्या मा भि स्वीणा द्यखणु रौं,मि द्यखणु रौं ॥
म्यारा भाग मा हि छे या,निरभागा की भताग ।
छारु लग्यां भाग थैं छिटणु रौं,मि छिटणु रौं ॥
मेरि लपग्यूं फर यो गंगल्वड़ा,को बांधि ग्याइ ।
कीला कु सि गोर रिटणु रौं,मि रिटणु रौं ॥
मील त ग्याइ मत्थि दाजी थैं,बुबाजि की चिट्ठी ।
किळै पोस्टमैन दादा थैं बिटमणु रौं,मि बिटमणु रौं ॥
कन कट्या आंख्यूं-आंख्यूं मा,सर्या रात "पयाश" ।
भदळुन्द कु छन्छ्या सि खिटणु रौं,मि खिटणु रौं ॥
यो क्य लेखिगे आंसुल जिकुड़ि की
पाटी मा ।
बगैर फुज्यां अफि-अफि मिटणु रौं,मि मिटणु रौं ॥
पयाश पोखड़ा
+91 92132 27970
PUBLICIZED BY उत्तराखंड की लगूली
भाई विनोद रावत जी को सप्रेम समर्पित
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