"आंसू" (गज़ल)
************************
**************************
रुंदा-रुंदा इतगा रुणपित ह्वैगीं आंसु ।
मेरि आंख्यूं मा सदनि खुण से गीं आंसु ॥
धौ-संदकै जनि मिल बिजळिं इ आंसु ।
तनि फेरि खुचलिम मुण्ड नवै गीं आंसु ॥
धुयां-धुयां लगणा छन इ काजोळ आंसु ।
आंसु थैं आंसुल भलिकै ध्वै गीं आंसु ॥
दिन-रात मेरि सीणी की निसिणी काया ।
मी दगड़ सर्या राति बिज्जी रैगीं आंसु ॥
सर्या साल आंसु कि फसल लैणा रवां ।
तैळ्या-मैळ्या सार्यूं छक्वै ह्वैगीं आंसु ॥
मुण्डम धैरिकि कर्जा कि सि फंच्ची ।
बिना बिसौण की जिदंगि कै गीं आंसु ॥
खौळ्यूं-खौळ्यूंबौळ्यूं सि च "पयाश" ।
लोग वैका गळ्वड़ों मा तरकै गीं आंसु ॥

पयाश पोखड़ा

+91 92132 27970

PUBLICIZED BY उत्तराखंड की लगूली