जु धार पोर यखुलि कुळैं डाळि नि हूंदी (गज़ल)
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मी से अब हौरि हाळि-झाळि नि हूंदी ।
सच्चे मी से अब आळि-टाळि नि हूंदी ॥
निसिणि जि किळै कैरु मि कैका बाना ।
न भैमी से अपणि रात काळि नि हूंदी ॥
जत्गा खतुदु उत्गा हौरि भ्वरे जांदा । 
मयळ्दु खुचिलि कभ्भी खाळि नि हूंदी ॥
जलमजात कु गळद्यवा छेदे ले छक्वै । 
पर मी खुणै तेरि गाळिगाळि नि हूंदी ॥
सदनि लुण्यां-काजोळ आंसु ब्वगणा रैं ।
मेरि खुदेड़ आंखि कभि छाळि नि हूंदी ॥
जु जिकुड़ा का भीतर चवी भैर भि चा ।
भला आदिम से कतै इंद्रजाळि नि हूंदी ॥
आज म्यारु गौं सोरग से कम नि हूंदु । 
जु द्वार-मोर-संगडु फर ताळि नि हूंदी॥
गौं का द्यप्ता गौं मै रैंदासरत लगैले ।
नेतौं का हथुम जु डौंरि-थाळि नि हूंदी ॥
कन जि नि द्यख्दा भय्यूं का सुख-दुख ।
जु द्विया भितरौं का बीच पाळि नि हूंदी ॥
यो मोळ कु माद्यौ सदनि मोळ रै जांदु ।
जु अंध्यरा मा तिल बत्ती बाळि नि हूंदी ॥
समळौण्यां खुद थैंको समळांदु 'पयाश'?
जु धार पोर यखुलि कुळैं डाळि नि हूंदी ॥

पयाश पोखड़ा

+91 92132 27970

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