"खुद" (गज़ल)
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आज फेरि हथगुळ्यु मा, किसळि सि लगणि चा ।
आज फेरि क्वी भटुळि,तिसळि सि लगणि चा ॥
आज फेरि क्वी भटुळि,तिसळि सि लगणि चा ॥
कब बटैकि दिखेणा छवा, कख छाया तुम ?
आज फेरि तेरि बात,हिंसळि सि लगणि चा ॥
दगड़्यौंल दगड़्यौं मा,इसक्वल्या छुईं पुरैना ।
आज फेरि जिकुड़ि मा,झिसळि सि लगणि चा ॥
आज फेरि जिकुड़ि मा,झिसळि सि लगणि चा ॥
बिसर्या दिनु कि खुद,क्वी ठस ठसोळि ग्याइ ।
आज फेरि दुखदा मा,ठिसळि सि लगणि चा ॥
आज फेरि दुखदा मा,ठिसळि सि लगणि चा ॥
कब बटैकि आंख्यूं मा,आंसु भैर नि आया ।
आज फेरि आंख्यूं मा,रिसळि सि लगणि चा ॥
आज फेरि आंख्यूं मा,रिसळि सि लगणि चा ॥
वो सुख्यूं सि फूल,कनै उड़ रे "पयाश" ।
आज मेरि जिकुड़ि,बिसळि सि लगणि चा ॥
आज मेरि जिकुड़ि,बिसळि सि लगणि चा ॥
पयाश पोखड़ा
+91 92132 27970
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