"एक कच्ची-पक्की "कच्ची" फर " (गज़ल)
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ब्वै-बब्बौ की पिनसनी मा ।
दारू पीणा छन दिनमनी मा ॥
दारू पीणा छन दिनमनी मा ॥
गोरु-बछुरु मुग्दान लगैकि,
कच्ची बणाणा छन छन्नी मा ॥
कन ढंर्गचाळ बिगड़ मवसौं कु,
छ्वारा बिहोस भप्पी ज्वनि मा ॥
ना करणि-धरणि ना कमै-
धमै,हथ पसरणा छन जननी मा ॥
खाणा-पीणाकु भलु सज अयूं च,
मौज-मजा कना छन परधनि मा ॥
खज्यतू अयूं च अर फजितू
हुयूं,गुंग बण्यां छन दाना दिवनी मा ॥
बिना पियां नरग रैण तिल "पयाश",
चित्त ह्वै जैलु तू एक चवन्नी मा ॥
पयाश पोखड़ा
+91 92132 27970
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