"बागी और बगावत" (गज़ल)
******************************
******************************
उत्तराखण्ड मा बाग्यू कि बक्किबात कि बग्वौत ह्वाई ।
कर्रर कग्वौत-कग्वौतिक सर्या सरकार कग्वौत द्याई ॥
कर्रर कग्वौत-कग्वौतिक सर्या सरकार कग्वौत द्याई ॥
गौं की रामलीला कु सि सीन खट्ट इन बदळ्याई ।
बागी बुगणा दगड़ ह्वैगीं अर खौळ्यूं सि
रौत ह्वाई ॥
बागी बुगणा दगड़ ह्वैगीं अर खौळ्यूं सि
रौत ह्वाई ॥
अंग्वाळ बोटिक दगड़ा दगड़ि खड़ि छे ब्यालि तलक ।
लाल बिलोज पिंग्ळि साड़ि पैरिक कैकि सौत ह्वाई ॥
लाल बिलोज पिंग्ळि साड़ि पैरिक कैकि सौत ह्वाई ॥
आरया आरि कुलड़ा चलै ग्याइ अपणों का जाड़ों फर ।
घ्वाड़ों की बिकरिबट्टम अपणा पाड़ा की मौत ह्वाई ॥
घ्वाड़ों की बिकरिबट्टम अपणा पाड़ा की मौत ह्वाई ॥
कुणजा का बूना ल सोरी ग्याइ जो कूणा कुणजुखाळा का ।
निरबिजी कै ग्याइ भग्यान बिदानसबा की औत ह्वाई ॥
निरबिजी कै ग्याइ भग्यान बिदानसबा की औत ह्वाई ॥
आज वळ्या ख्वाळ त भोळ पळ्या ख्वाळ सिन नि डब्का ।
धरु-धरु मा नि नचावा लोकतंतर अब मजाक भौत ह्वाई ॥
धरु-धरु मा नि नचावा लोकतंतर अब मजाक भौत ह्वाई ॥
सरम न ल्याज, इनै कु प्याज उनै भ्याज, यो कनु रिवाज ।
हण्ड-बिभण्ड कैरि उत्तराखण्ड दगड़ कनि ठग्वौत ह्वाई ॥
हण्ड-बिभण्ड कैरि उत्तराखण्ड दगड़ कनि ठग्वौत ह्वाई ॥
पयाश पोखड़ा
+91 92132 27970
PUBLICIZED BY उत्तराखंड की लगूली
.jpg)
0 Comments