एक "ग्याड़ू" की (गज़ल)
************************ "लकदक डाळि" (भाई गणेश काला जी का नाम समर्पित)
************************ "लकदक डाळि" (भाई गणेश काला जी का नाम समर्पित)
बल ज्व डाळि जत्गा लकदक रैंद ।
ढुंगेरु की वींफरै उत्गा टक रैंद ॥
ढुंगेरु की वींफरै उत्गा टक रैंद ॥
कैल कै छे या सर्या डाळि खालि ।
सित्गा याद कब कैथै कख रैंद ॥
सित्गा याद कब कैथै कख रैंद ॥
सर्र बिसर जांद वा पुरणी कचगा ।
नै कुटमणों मा बणि लकझक रैंद ॥
नै कुटमणों मा बणि लकझक रैंद ॥
ढुंगा चुटन्दरा को छाई ? कुजाण ।
वींकु सदनि 'पयाश' फर शक रैंद ॥
वींकु सदनि 'पयाश' फर शक रैंद ॥
डाळि जैकि ह्वैलि तैकि ह्वैलि भारे ।
हां, छैलु बैठणा कु त सबुकु हक रैंद ॥
हां, छैलु बैठणा कु त सबुकु हक रैंद ॥
बिसुदि छैल की सुनिंदि मा ख्याल नि ।
डाळि कु लप्यता प्वड़्यूं जख-तख रैंद ॥
डाळि कु लप्यता प्वड़्यूं जख-तख रैंद ॥
पयाश पोखड़ा
+91 92132 27970
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