"भारे ! याद राखि" (गज़ल)
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ग्वेर छ्वारौं दगड़ कबि,ठट्ठा नि कैरी ।
छ्यूंता-छिलबट दगड़ कबि, अग्यलुपट्टा नि धैरी ॥
छ्यूंता-छिलबट दगड़ कबि, अग्यलुपट्टा नि धैरी ॥
भग्यनि जतन कैकि मिलद,मयल्दु-माया ।
माया कैका दगड़ कबि,कट्ठा नि कैरी ॥
माया कैका दगड़ कबि,कट्ठा नि कैरी ॥
ढ्वाया-ढुएर लग्यां छन,भीड़ा मिसाण फर ।
चौका मा सुपिन्यों कु कबि,चट्टा नि धैरी ॥
चौका मा सुपिन्यों कु कबि,चट्टा नि धैरी ॥
त्यारा बाना कखि क्वी,जोगी नि बणि जाऊ ।
म्वारा ऐथर टिमरू कु कबि,लट्ठा नि धैरी ॥
म्वारा ऐथर टिमरू कु कबि,लट्ठा नि धैरी ॥
जु कतगौं की मौ-मवसि,घाम लगै गैन ।
वुं जिवरों का कीसाउन्द कबि,लगनपट्टा नि धैरी ॥
वुं जिवरों का कीसाउन्द कबि,लगनपट्टा नि धैरी ॥
कखड़ि-ग्वदड़ि फर बि लोग,सुई लगाणा छन ।
डुट्यळु का पीठिम मूळा कु, कट्टा नि धैरी ॥
डुट्यळु का पीठिम मूळा कु, कट्टा नि धैरी ॥
बुढेनदावकि चिगैं चा तू,बुरु नि मानी "पयाश" ।
लाब-काब बोलिक कैका प्राण,खट्टा नि कैरी ॥
लाब-काब बोलिक कैका प्राण,खट्टा नि कैरी ॥
पयाश पोखड़ा
+91 92132 27970
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