"इनु बि क्या ?" (गज़ल)
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न चिट्ठी, न पतरि, न क्वी रंत, न रैबार आंद ।
अब कख क्वी कैका वार-ध्वार,
आंद-जांद ॥
अब कख क्वी कैका वार-ध्वार,
आंद-जांद ॥
चखुला उडणा छन त उडण दे,स्यूं बिचरों थैं ।
जख चार बियां ह्वाला घुघुति, वखि त जांद ॥
जख चार बियां ह्वाला घुघुति, वखि त जांद ॥
खन्द्वार हुईं डण्ड्यळि की कुछ, सुणि ले जरा ।
तिबरि कु खम्ब बि बगत दगड़ खड़ु,नि रै पांद ॥
तिबरि कु खम्ब बि बगत दगड़ खड़ु,नि रै पांद ॥
स्यो बन्दुक्या दादा कै फर सिसाद, लगाणु चा ।
क्वी भर्वसु नि गोळ्युंकु कब अफु
जनै आंद ॥
क्वी भर्वसु नि गोळ्युंकु कब अफु
जनै आंद ॥
या दुन्यां त अजकाळ भौत छ्वटि सि, ह्वै ग्याइ ।
पर आबत-अस्नौ, भयात किळै दूर
ह्वै जांद ॥
पर आबत-अस्नौ, भयात किळै दूर
ह्वै जांद ॥
मिल त कबि कुछ बि नि मांगु छाइ
द्यप्तौं मा ।
पर स्यो "पयाश" किळै भट्ट अंग्वाळ बोटि जांद ॥
द्यप्तौं मा ।
पर स्यो "पयाश" किळै भट्ट अंग्वाळ बोटि जांद ॥
पयाश पोखड़ा
+91 92132 27970
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