""आंख्यूं की बोली"(हाइकु)
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आंखा देसि फुकणां,आंसु गढ़्वळिम रुझणां,द्विया बीगीं गैन बोलि ॥ (१)
आंखा रुक्यां सि,स्वीणा दुख्यां सि,फेरि भि द्यखणां की कै बै ॥ (२)
आंखि पटगाबन्द,सुपिन्यां चिलांग,फज़ल रतखुलणिम तक ॥ (३)
आंख्यूं मा उज्यळु,जिकुड़ि मा मुच्छ्यळु,घनाघोर चुक्कापट्ट त्वै जनै ॥ (४)
उळ्यरा आंखा,कल्यरा बाटा,रुम्कां रुम्कां मैत जनै ॥ (५)
जिकुड़ि कु डाउ,आंख्यूं मा आंसु,राउ त कनकै राउ ॥ (६)
दिन-द्वफिरि जुन्यळि,ग्यूं कि रोटी चुन्यळि,तू देळिम जून छज्जम ॥ (७)
ब्यौ पल्या ख्वाळा,अर्सा, भूड़ा, स्वाळा,मोत्याबिन्द आंख्यूं मा मोती बिन्दु ॥ (८)
फुलफटंगा जून द्याखा,जम्मा नि झपकाइ आंखा,कतगा लब्ब्ब्बी खुद ॥ (९)
हर्च्यां आंखा,जग्वळ्या बण्यान,कै अपच्छ्यणकुल का ॥ (१०)
खौळ्यां आंखा,बौळ्या जिन्दगि,तिल द्याखा, मिल द्याखा ॥ (११)
पयाश पोखड़ा
+91 92132 27970
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