२""आंख्यूं की बोली"(हाइकु)
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तुम तबरि तक तमखू भ्वरणां रयां,वो बल आला साल पांचेकम ॥
तुम तबरि तक दिनमनि म्वरणां रयां,
वो बल आला साल पांचेकम ॥
तुम तबरि तक दिनमनि म्वरणां रयां,
वो बल आला साल पांचेकम ॥
दूध पेकि, परळि चाटिकि,घ्यू घूळिगीं त्यारा बांठा को ।
तुम तबरि तक भदळि क्वरणां रयां,वो बल आला साल पांचेकम ॥
तुम तबरि तक भदळि क्वरणां रयां,वो बल आला साल पांचेकम ॥
कूल पेकि, सड़क बुखैकि,डिग्गी सपोड़िगीं त्यारा गांवा की ।
तुम तबरि तक पाणि च्वरणा रयां,वो बल आला साल पांचेकम ॥
तुम तबरि तक पाणि च्वरणा रयां,वो बल आला साल पांचेकम ॥
स्वीणा फर स्वीणा दिखैकि,त्यारा सबि सुपिन्या सर्र स्यळैगीं ।
तुम तबरि तक स्वीणा स्वरणा रयां,वो बल आला साल पांचेकम ॥
तुम तबरि तक स्वीणा स्वरणा रयां,वो बल आला साल पांचेकम ॥
धर्ती का द्यप्ता स्वां लापता,डौंरि-थकुलि यखुलि छोडि-छाडिकि,तुम तबरि तक कूंणों ख्वजणा रयां,वो बल आला साल पांचेकम ॥
पयाश पोखड़ा
+91 92132 27970
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