"सड़क"(गज़ल)
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बट्या-बाट ठिट्ट झणि कख जि जाणि 
च य सड़क ।
रस्तम अयां मनिख्यूं थैं कख जि लिजाणि च य सड़क ॥
न भै न, कभि लटंगौं का बाना भि सड़क गौं तक आई ?हां, पड़्यां-लिख्यौं थैं डिल्लि धौ लिजाणि च य सड़क ॥
दिनमनि उज्यळौ मा कत्गौं फर उत्यड़ा लगणा छन ।
पर राति अंध्यरा मा सीदा घारम लिजाणि च य सड़क ॥
सड़कि का घूम सि मरोड़ि याल तुमुल भि य ज़िंदगि ।
कभि त्यारु ल्वै अर म्यारु पस्यौ लिजाणि च य सड़क ॥
क्वादू-झुंगरू-कौंणि का डाळा द्यखणा का बाना ।
कभि-कभि नाति-नतणों थैं गौं लिजाणि च य सड़क ॥
एकदां चिफ्ळै गैन जु चिफ्ळपट्ट द्विया पौ "पयाश" का ।
अग्नै भि चिफ्ळैणा कि डैर चा इन बताणि च य सड़क ॥

पयाश पोखड़ा

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