"लोकतंतर सारी का उज्याड़ खवा" (गज़ल)
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गुर्राव जन लोकतंतर मड़-मड़कै गीं ।
नेतजि बल उत्तराखंड तड़-तड़कै गीं ॥

उत्तराखंड की रांठि-बांठि लगैकि ।
सर्या ल्वै निचोड़िक सड़-सड़कै गीं ॥

झ्वळि-झुंगरुछंछ्या-पळ्यौ हम जनै ।
अफु निरपणि की खीर थड़-थड़कै गीं ॥

कपळि मा डाम धार डाम बणैंकि ।
पाड़पाणिपैसा खड़-खड़कै गीं ॥

भैर-भैर लड़ैं-लड़ैं भितनां एक भै ।
गौंमा मवार सबुथैं भड़-भड़कै गीं ॥

खै पे कि लद्वड़ि-पुटिगि मलासिक ।
जुठा पत्तळा हम जनै रड़-रड़कै गीं ॥

आवा साब बैठा साब हथज्वड़ै काया ।
वो खटुला पीड़ा कुरसी चड़-चड़कै गीं ॥

वोट दियाल अब जादा नि बोल तू ।
तेरि छुयुं मा नेतजि नड़-नड़कै गीं ॥

अपणु समझिक मिल हथ क्य पखड़ । 
नेतजि 'पयाशथैं हड़ु हड़-हड़कै गीं ॥

पयाश पोखड़ा

+91 92132 27970

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