उलखणि-उलखणि (गज़ल)
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कन रुसाई म्यारु दगड्या,ब्याळि यखुलि छोड़ि ग्याइ 
निंद बिटोळि-बटाळिक ल्हीग,
खालि-खटुलि छोड़ि ग्याइ 
रात-दिनब्यखुनि-फज़ल,सदनि जैंथैं पुजणां रवां 
जिकुड़ि का बांजा चौक ,डाळि तुलसी छोड़ि ग्याइ 
त्यारा बगैर खुदेड़ दिनुकि,गणत करदा रै ग्यवां 
वो नै कलैण्डर टंकणा को,खालि दिवलि छोड़ि ग्याइ 
स्वीणां अंछण्यांटम धैरिक,बिरणि माया गिंडाणा कु  
खुद रमठाणा का बाना,ख्वींडी थमळि छोड़ि ग्याइ 
नच्दा-नच्दा द्यप्ता थैं,भारि भिरिंगी चैड़ि ग्याइ 
लाल आंख्यूं देखि जगरि,डौंरि थकुलि छोड़ि ग्याइ 
बिजोग प्वाड़ मति फर,मि  चट्ट बिसिरि जांदु 
खुद लगाणु कु सिर्वणि ताळ,अपणि नथुलि छोड़ि ग्याइ 

पयाश पोखड़ा

+91 92132 27970

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